पुणे : ग्रामीण क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, मूल्य आधारित शिक्षण तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए उल्लेखनीय योगदान देने वाले श्री विष्णु अष्टुरकर को उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक कार्यों के लिए राष्ट्रीय आदर्श शिक्षक पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया। यह सम्मान शिक्षा के क्षेत्र में उनके समर्पण, नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों तथा समाज में शैक्षणिक जागरूकता बढ़ाने के लिए किए गए महत्वपूर्ण प्रयासों की मान्यता है।
श्री विष्णु अष्टुरकर का मानना है कि शिक्षा केवल पुस्तक ज्ञान तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण और उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव होती है। इसी विचारधारा के साथ उन्होंने अपने शिक्षकीय जीवन में विद्यार्थियों के शैक्षणिक, नैतिक तथा सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य किया है।
शिक्षा के क्षेत्र में उनके विशेष योगदानों में सरल, प्रभावी एवं आनंददायी शिक्षण पद्धतियों का उपयोग प्रमुख है। ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को विषयों की बेहतर समझ प्रदान करने के लिए उन्होंने स्थानीय उदाहरणों, चित्रों, चार्ट, मॉडलों तथा गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धति का प्रभावी उपयोग किया। गणित और विज्ञान जैसे विषयों को रोचक बनाने के लिए उन्होंने स्वयं शैक्षणिक सामग्री तैयार की तथा विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से सीखने के अवसर प्रदान किए।
विद्यालय में पठन संस्कृति विकसित करने के उद्देश्य से उन्होंने नियमित वाचन गतिविधियों की शुरुआत की। विद्यार्थियों को कहानी, कविता, प्रेरणादायक साहित्य तथा ज्ञानवर्धक पुस्तकों के अध्ययन के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे उनमें पढ़ने की रुचि और बौद्धिक विकास को बढ़ावा मिला। सीमित संसाधनों के बावजूद मोबाइल, प्रोजेक्टर तथा शैक्षणिक वीडियो जैसे डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों से जोड़ने का सराहनीय प्रयास किया गया।
कमजोर एवं अध्ययन में पिछड़ रहे विद्यार्थियों के लिए विशेष मार्गदर्शन कक्षाओं का आयोजन किया गया। व्यक्तिगत ध्यान एवं अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग के माध्यम से उनके शैक्षणिक प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार लाने में सफलता प्राप्त हुई।
विद्यार्थियों के नैतिक एवं चारित्रिक विकास को भी उन्होंने समान महत्व दिया। प्रतिदिन प्रार्थना सभा में प्रेरणादायी विचार, महापुरुषों के जीवन प्रसंग, राष्ट्रीय मूल्यों तथा नैतिक शिक्षा से संबंधित चर्चाओं का आयोजन किया जाता है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों में अनुशासन, समयपालन, ईमानदारी, स्वच्छता, सहयोग और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे गुण विकसित करने का प्रयास किया गया।
विद्यालय में खेलकूद, भाषण प्रतियोगिता, निबंध लेखन, चित्रकला, विज्ञान प्रदर्शनी एवं विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का नियमित आयोजन कर विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ा तथा अनेक विद्यार्थियों ने विभिन्न स्तरों की प्रतियोगिताओं में सफलता प्राप्त कर विद्यालय का नाम गौरवान्वित किया।
पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में भी श्री अष्टुरकर का योगदान उल्लेखनीय रहा है। विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने के लिए वृक्षारोपण अभियान, स्वच्छता अभियान तथा जल संरक्षण से संबंधित गतिविधियों का आयोजन किया गया। साथ ही विद्यार्थियों को विभिन्न सामाजिक उपक्रमों में सहभागी बनाकर उनमें सामाजिक जिम्मेदारी एवं राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित की गई।
विद्यालय एवं समाज में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए उन्होंने अभिभावकों के साथ नियमित संवाद स्थापित किया। समय-समय पर पालक सभाओं का आयोजन कर विद्यार्थियों की प्रगति पर चर्चा की गई तथा घर पर अध्ययन के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया। कई अवसरों पर घर-भेंट कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों की परिस्थितियों को समझकर उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई गई।
विद्यालय छोड़ने की स्थिति में आने वाले विद्यार्थियों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए गए। ग्रामसभा, पालक बैठकों एवं सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने का कार्य किया गया। विशेष रूप से बालिका शिक्षा और नियमित विद्यालय उपस्थिति को प्रोत्साहित करने के लिए प्रभावी अभियान चलाए गए।
विद्यालय परिसर को स्वच्छ, सुंदर एवं शैक्षणिक दृष्टि से समृद्ध बनाने के लिए विद्यार्थियों, सहकर्मियों एवं ग्रामवासियों के सहयोग से विभिन्न उपक्रम संचालित किए गए। विद्यालय की दीवारों पर शैक्षणिक चित्र, प्रेरक संदेश एवं विषय आधारित जानकारी प्रदर्शित कर सीखने के अनुकूल वातावरण तैयार किया गया। हरित विद्यालय अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण कर विद्यार्थियों को पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।
ग्रामीण शिक्षा, मूल्य आधारित शिक्षण, पर्यावरण संरक्षण एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए श्री विष्णु अष्टुरकर को राष्ट्रीय आदर्श शिक्षक पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया। उनका कार्य शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने और जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण की दिशा में प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत करता है।
