पुणे : शिक्षा के क्षेत्र में नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता तथा विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों के सम्मान स्वरूप सौ. अनिता सूर्यकांत दारवटकर को राज्यस्तरीय आदर्श शिक्षक पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया।

वनाझ परिवार विद्यामंदिर की प्राचार्या के रूप में कार्यरत सौ. अनिता सूर्यकांत दारवटकर ने विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति रुचि निर्माण करने और उन्हें व्यवहारिक जीवन के लिए तैयार करने हेतु अनेक अभिनव उपक्रमों का सफलतापूर्वक संचालन किया है। उनका मानना है कि यदि शिक्षा आनंददायी और अनुभव आधारित हो तो विद्यार्थी अधिक प्रभावी ढंग से सीखते हैं। इसी उद्देश्य से विद्यालय में आनंददायी शिक्षण पद्धति को विशेष महत्व दिया जाता है।

विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों की योजना और संचालन की जिम्मेदारी विद्यार्थियों को दी जाती है। इससे उनमें नियोजन कौशल, निर्णय क्षमता और टीमवर्क की भावना विकसित होती है। व्यावसायिक शिक्षा की प्रारंभिक समझ विकसित करने के लिए विद्यालय में विद्यार्थियों को राखी निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाता है। इस उपक्रम के अंतर्गत विद्यार्थी शिक्षकों के साथ आवश्यक सामग्री खरीदते हैं, राखियां तैयार करते हैं तथा विद्यालय में स्टॉल लगाकर उनकी बिक्री भी करते हैं। इससे विद्यार्थियों को व्यवसाय, निवेश, लाभ और हानि जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं का व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त होता है।

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी उन्होंने कई प्रेरणादायी उपक्रम शुरू किए हैं। विद्यालय परिसर में पेड़ों से गिरने वाले पत्तों को कचरे में फेंकने के बजाय जैविक खाद बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। इस प्रकल्प के माध्यम से विद्यार्थियों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और जैविक खेती का महत्व समझाया जाता है। इसके साथ ही विद्यालय में प्लास्टिक के उपयोग को पूर्णतः हतोत्साहित करते हुए विद्यार्थियों को स्टील के टिफिन और पानी की बोतलें उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाता है।

विद्यालय के आसपास स्थित नदी परिसर की स्वच्छता के लिए भी विशेष अभियान चलाया जाता है, जिसमें कक्षा पांचवीं और आठवीं के विद्यार्थी सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और सामाजिक जागरूकता विकसित होती है।

विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास को ध्यान में रखते हुए विद्यालय में शारीरिक क्षमता परीक्षण आयोजित किए जाते हैं। विद्यार्थियों का BMI परीक्षण कर अभिभावकों को आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है। मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए विभिन्न सांस्कृतिक, सामाजिक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

विद्यार्थियों में कृतज्ञता और पारिवारिक मूल्यों का विकास करने हेतु विद्यालय में “महिला दिन” और “बाबा दिन” जैसे विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थी अपने माता-पिता के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जिससे उनमें पारिवारिक मूल्यों और संवेदनशीलता का विकास होता है।

विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए समूह कार्य, वैयक्तिक मार्गदर्शन तथा विविध शैक्षणिक उपकरणों का प्रभावी उपयोग किया जाता है। अध्ययन में कमजोर विद्यार्थियों को विशेष मार्गदर्शन प्रदान कर उनकी सीखने की क्षमता को विकसित किया जाता है। आधुनिक शैक्षणिक साधनों और गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धति के कारण विद्यार्थियों में अध्ययन के प्रति रुचि और आत्मविश्वास दोनों में वृद्धि हुई है।

विद्यालय में शिक्षा के साथ-साथ अनेक सहशैक्षणिक गतिविधियों का भी नियमित आयोजन किया जाता है। दप्तरविहीन शाला, योग दिवस, रक्षाबंधन, बालसभा, क्षेत्रभेट, वर्ग स्वच्छता स्पर्धा, नदी परिसर स्वच्छता अभियान, खत प्रकल्प, फटाका मुक्त दिवाली तथा प्लास्टिक मुक्त परिसर जैसे उपक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त अभियान के क्षेत्र में किए गए कार्यों के कारण विद्यालय का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर के Climatoora प्लेटफॉर्म तक पहुंचा है, जो विद्यालय और विद्यार्थियों के लिए गौरव की बात है।

शिक्षा में नवाचार, पर्यावरण जागरूकता, विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए सौ. अनिता सूर्यकांत दारवटकर को राज्यस्तरीय आदर्श शिक्षक पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया। उनकी यह उपलब्धि शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी मानी जा रही है।

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