पुणे : खेल शिक्षा, योग प्रशिक्षण तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली श्रीमती योगिनी अमोल कानडे को उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक एवं खेल संबंधी कार्यों के लिए राष्ट्रीय आदर्श शिक्षक पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया। यह सम्मान विद्यार्थियों में खेल संस्कृति, शारीरिक स्वास्थ्य, अनुशासन एवं नेतृत्व क्षमता विकसित करने हेतु किए गए उनके समर्पित प्रयासों के लिए प्रदान किया गया।

एक खेल शिक्षिका के रूप में श्रीमती योगिनी कानडे का मानना है कि खेल केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने विद्यार्थियों में शारीरिक फिटनेस, मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास एवं सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए खेलों को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाया है।

पिछले तीन वर्षों से उनकी शाला में खेल विभाग के अंतर्गत सात अभिनव उपक्रम सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं। इनमें योग, मल्लखंब, रोप मल्लखंब, जिम्नास्टिक, सिलंबम (शिवकालीन लाठी-काठी खेल), तायक्वांडो तथा स्केटिंग जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। इन उपक्रमों ने विद्यार्थियों में खेलों के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक विकास को भी नई दिशा प्रदान की है।

श्रीमती कानडे के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने नियमित प्रशिक्षण प्राप्त कर विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। खेलों के माध्यम से विद्यार्थियों में अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता, धैर्य और प्रतिस्पर्धात्मक भावना का विकास हुआ है। शाला द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

उन्होंने खेल शिक्षा को केवल मैदान तक सीमित न रखते हुए शैक्षणिक खेलों और गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया है। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में समस्या समाधान, तार्किक चिंतन, सृजनात्मकता और सामाजिक कौशल विकसित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया गया है। बच्चों को संवाद, सहयोग और समूह में कार्य करने की प्रेरणा देकर उनके व्यक्तित्व विकास को नई दिशा दी गई है।

प्राथमिक विभाग के विद्यार्थियों के साथ कार्य करते हुए श्रीमती कानडे ने खेल आधारित शिक्षण की प्रभावशीलता को सिद्ध किया है। लेझीम, टिपरी, एरोबिक्स, संचलन, काठी कवायत, सूर्य नमस्कार, योगासन एवं अन्य पारंपरिक खेलों के माध्यम से विद्यार्थियों में उत्साह, अनुशासन और आत्मविश्वास का विकास किया गया है।

उनका मानना है कि खेल बच्चों की स्वाभाविक प्रवृत्ति है और यही प्रवृत्ति उन्हें सीखने, सक्रिय रहने तथा जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। खेल बच्चों को हार-जीत को स्वीकार करना, चुनौतियों का सामना करना तथा जीवन में सकारात्मक बने रहना सिखाते हैं।

विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास के लिए किए गए उनके उल्लेखनीय प्रयासों को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय आदर्श शिक्षक पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया। उनका कार्य खेल शिक्षा के माध्यम से स्वस्थ, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण की दिशा में प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत करता है।

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